हर पल दा, ओ दातिए, शुक्राना तेरा ll

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हर पल दा, ओ दातिए, शुक्राना तेरा ll

जो भी, मेरे पास है वोह ll, नज़राना तेरा,,,

हर पल दा, ओ दातिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मुझ पे, हर पल, तेरी इतनी, किरपा होई ll

देख के, तेरी किरपा मेरी, आँखे रोई ll

तूँ जाने, देने का क्या है ll, बहाना तेरा,,,

हर पल दा, ओ दातिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

यह, अहसास है, मुझको यही, दिल ने माना ll

तेरी, किरपा बड़ी, दाती मेरा, छोटा शुक्राना ll

तूँ मुस्काए, तो होता है ll, मुस्काना मेरा,,,

हर पल दा, ओ दातिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

तेरी किरपा, की छाया हो, ज्ञान के सर पे ll

कहे, पुनीत मैं बैठा रहूँ, बस तेरे दर पे ll

शायद तुझको, भा गया है* ll, झुक जाना मेरा,,,

हर पल दा, ओ दातिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।