राघव तेरे चरण की मैं धूल कैसे पाऊं

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

राघव तेरे चरणों की मैं धूल कैसे पाऊं।

विनती में एक अपनी कैसे तुम्हें सुनाऊं।।

दर पे तुम्हारे आया ठुकरा दे या उठाले,

मैं गरीब रघुवर कृपा तेरी कैसे पाऊं।।

ध्रुव प्रहलाद जैसे भक्ति ना मेरी राघव।

केवट जैसे प्रभु मैं कैसे चरण ये पाऊं।।

तुलसी कबीर जैसे मुझ में न ज्ञान राघव।

राजेंद्र जटायु जैसे तेरे गोद कैसे पाऊं।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।