कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

नहीं आना ते मैनुही बुला पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

मिलने दी आस मैनु हर वेले रेहँदी ऐ-2

शाम सवरे माँ उड़ीक तेरी रेहँदी ऐ-2

आके बच्या नू दर्श दिखा पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके तूमेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके मां मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये.

• प्रथमे गुरु वंदना करां... ​

श्रद्धा दे नाल तेरी ज्योत जगावां मैं-2

फुला नाल माये तेरा आसन सजावां मैं-2

आके बच्या ते मेहरा वरसा पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये..

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके मां मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये.

तेरे नाल माये मेरा वसदा जहान ऐ-2

तेरे बिना माये मेरी दुनिया वीरान ऐ-2

आके बच्या दे सीने ठण्ड पा पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये.

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके मां मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये.

आवेंगी जे माँ मेरा मन खिल जायेगा-2

मैनु मेरी माई दा प्यार मिल जायेगा-2

आके राज नू् भी गोदी च सुला पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये,

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके मां मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये.कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

नहीं आना ते मैनुही बुला पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

मिलने दी आस मैनु हर वेले रेहँदी ऐ-2

शाम सवरे माँ उड़ीक तेरी रेहँदी ऐ-2

आके बच्या नू दर्श दिखा पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके तूमेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके मां मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये.

• प्रथमे गुरु वंदना करां... ​

श्रद्धा दे नाल तेरी ज्योत जगावां मैं-2

फुला नाल माये तेरा आसन सजावां मैं-2

आके बच्या ते मेहरा वरसा पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये..

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके मां मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये.

तेरे नाल माये मेरा वसदा जहान ऐ-2

तेरे बिना माये मेरी दुनिया वीरान ऐ-2

आके बच्या दे सीने ठण्ड पा पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये.

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके मां मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये.

आवेंगी जे माँ मेरा मन खिल जायेगा-2

मैनु मेरी माई दा प्यार मिल जायेगा-2

आके राज नू् भी गोदी च सुला पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये,

कदे चलके तू मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये

कदे चलके मां मेरे वल आ पहाड़ा विच रहन वालिये.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।