शेरा वाली तेरा द्वार आ गया महरा वाली तेरा द्वार आ गया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरा वाली तेरा द्वार आ गया महरा वाली तेरा द्वार आ गया

ऐसा लगता है सारा संसार आ गया

हुकम तेरा था मैं भी आ गया

आके दर पे ये दिल को करार आ गया

शेरा वाली तेरा ......

शेरोन वाली औ शेरो वाली

शेरा वाली के दर झुक गया जो भी गर

कट गयी ब्याधिया ना फशे वो भवर

मोह माया का ना हो कोई भी असर

धयान लग जाये माता के चरणों मैं गर

मोक्ष मिलता है वो भव से तार कर गया

शेरा वाली तेरा ......

ऊँचे ऊँचे पहाड़ो मैं तेरा निवास

दींन दुखियों गरीबो की तू ही है आस

तेरा दर हो मेरा सर हो तो मजा आ जाये

मुझ पे मैया की नजर हो तो मजा आ जाये

ज़िन्दगी यूँ ही गुजर हो तो मजा आ जाये

अपने चरणों से मुझ को लगा लो ना माँ

छोड़ के दर तेरा बोलो जाऊ कहा

मतलबी दुनिया से मेरा जी भर गया

शेरा वाली तेरा ......

है सुना मैंने तुम भर्ती हो सारे गम

आया हूँ दर तेरे रख लो थोड़ा भरम

भर दिया माथे पे लिख के लाया हूँ मैं

सारी दुनिया जहां का सताया हूँ मैं

पंहुचा दर पे तो दिल को करार आ गया

शेरा वाली तेरा ......

कहते कहते गुनी ना बया कर सके

तेरी माहिमा अपार कोई क्या कह सके

मैं हूँ नादान मूरख अज्ञानी हूँ माँ

ज्ञान दो माँ का गुण तेरे गाता जाऊ माँ

ध्यान रखना तेरे दर पे तेरा दास आ गया

शेरा वाली तेरा ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।