भंग पीला दे न गोरा, मेरा नशा सा ढीला होरा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज :-तू बीन बजा दे न जोगी

ठाले कुंडी ला दे रगड़ा मत कर गोरा खामखा झगड़ा,

पीके भंग हरिद्वार में जाऊं रे सब मने देखते रह जागे मैं ऐसा डमरू बजाउ

रे भंग पिला दे न गोरा मेरा नशा सा ढीला होरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।