मेरा अवगुण भरा शरीर, हरी जी कैसे तारोगे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरा अवगुण भरा रे शरीर,

हरी जी कैसे तारोगे, प्रभु जी कैसे तारोगे

ना मैं छील खिलाए छिल्के,

ना मैं फ़ाडे चीथरे दिल के

तेरी उंगली पे बाँधा ना चीर

हरी जी कैसे तारोगे....

हरी जी कैसे तारोगे, प्रभु जी कैसे तारोगे

[मेरे नाथ मेरे नाथ,

दीनानाथ, मेरे नाथ] ....(2)

भव सागर में कूद पड़ा हूँ

मोह माया में जकड़ा पड़ा हूँ

मेरे पाँव पड़ी जंज़ीर

हरी जी कैसे तारोगे....

हरी जी कैसे तारोगे, प्रभु जी कैसे तारोगे

बार बार आने जाने में

जन्मों के ताने बाने में

मेरी उलझ गयी तक़दीर

हरी जी कैसे तारोगे....

हरी जी कैसे तारोगे, प्रभु जी कैसे तारोगे

[मेरे नाथ मेरे नाथ,

दीनानाथ, मेरे नाथ] ....(2)

चाहे लाख खामोश रहूं मैं

कितना भी निर्दोष रहूं मैं

मैं हूँ त्रुटियों की तस्वीर

हरी जी कैसे तारोगे, प्रभु जी कैसे तारोगे

मेरा अवगुण भरा रे शरीर,

हरी जी कैसे तारोगे, प्रभु जी कैसे तारोगे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।