मेरा कस के पकड लो हाथ, छुडाऊं तो छुडाया नहीं जाये

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

जब तक है जीवन मेरा

प्रभु हम ना बदलें

और बदलने से पहले गुरूवर

मेरे प्राण निकले।

मेरा कस के पकड लो हाथ

छुडाऊं तो छुडाया नहीं जाये

छुडाऊं तो छुडाया नहीं जाये2

मेरा.....

समय न निकालुं गर जो तेरी बदंगी का

आखिरी दिन हो गुरूवर मेरी जिन्दगी का

मेरे दिल पर लिख तेरा नाम मिटाऊं तो मिटाया नहीं जाये 2

मेरा कस के पकड लो हाथ....

बंधन की डोर टूटे जिस दिन हमारी

हाथोंहाथ बंद कर देना तू धड़कन हमारी मेरा दिल किसी और के साथ लगाऊँ तो लगाया नहीं जाये

तमन्ना रहे मिलने की मिलने के बाद भी

साथ रहना चाहता हूं मैं मरने के बाद भी

तेरा भूलूं अगर मैं नाम तो भुलाऊं तो भुलाया नहीं जाये।।

मेरा कस के पकड लो हाथ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।