सावन में खिले फुलवारी फुल बंगले की शोभा है न्यारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तरज़:-श्याम चुड़ी बेचने आया

सावन में है खिली फुलवारी,फुल बंगले की

शोभा है न्यारी

राधा संग कूंज बिहारी,फुल ब़गले की

शोभा है न्यारी सावन....

1.रस भरे फुल कलियों में शबाब है,

खुशबू से भरे मोतिया गुलाब है

महकी महकी है क्या फुलवारी,

फुल बंगले की शोभा है न्यारी

सावन....

2.ब्रह्मा विष्णु दिवाने श्रृगांर के,

नर ऋषि मुनि प्यासे दिदार के

छंवि तीन लोक में प्यारी,फुल बंगले की

शोभा है न्यारी सावन....

3.युगल जोड़ी पे कुर्बां जहान है,रसका पागल

पे ये महर्बांन है

बांकीं झांकी लगे धसका प्यारी,फुल बंगले

की शोभा है न्यारी

सावन में है खिले फुलवारी,फुल बंगले की

शोभा है न्यारी

सावन....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।