कहाँ छुपे हो राम हमारे , रो रो भरत जी राम पुकारे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

कहाँ छुपे हो राम हमारे,

रो रो भरत जी राम पुकारे।

होंठ है सूखे प्यास के मारे।

तुझ बिन अधूरा हुँ मै, प्राण गए क्यों तन से छोड़ के।

अवध भी लागे सुना, जब से गए होI

तन को छोड़के अब मै जियूँगा किसके सहारे

अब तो महल भी लागे, जैसे कोई समसान है।

कल थी जहाँ खुशहाली आज लगे वीरान है.

क्या लिखा है भाग्य हमारे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।