अख्खिओं नी अजे बंद न होना मियाँ आना ऐ,

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अख्खिओं नी अख्खिओं नी,

अख्खिओं नी अजे बंद न होना मियाँ आना ऐ,

जग नु तारन वाली दा असा दर्शन पाना ऐ,

अख्खिओं नी अख्खिओं नी,

राता जाग जाग के कटीया दिन वी बीते ना,

राज रानी महारानी दे असा दर्शन किते ना,

जानी जान नु अपने दिल दा हाल सुनाना ऐ,

जग नु तारण वाली दा असा दर्शन पाना ऐ,

अख्खिओं नी अख्खिओं नी अख्खिओं नी अख्खिओं नी,

दिल दियां गला दिल विच रहियां माँ नु ना कहियां,

अज कहंदा कल कहंदा एह्दा उमरा लंग गईयाँ,

हूँ ते शायद आ जाए ओहनू पता की जाना ऐ,

जग नु तारण वाली दा असा दर्शन पाना ऐ,

अख्खिओं नी अख्खिओं नी अख्खिओं नी अख्खिओं नी,

मेरी विनती सुनके माँ एक वार ता आएगी.,

एक वार ता मेरे घर वी माँ फेरा पाएगी,

राज दे करमा ते माँ ने कर्म कमाना ए,

जग नु तारण वाली दा असा दर्शन पाना ऐ,

अख्खिओं नी अख्खिओं नी अख्खिओं नी अख्खिओं नी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।