झूला झूलन पधारो श्यामा कुंज बिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

झूला झूलन पधारो

झूला झूलन पधारो श्यामा कुंज बिहारी।

श्यामा कुंज बिहारी, राधा रसिक बिहारी।

श्यामा बांके बिहारी, राधा रमण बिहारी।

राधावल्लभ लाल, युगल जोरी उजियारी-झूला झूलन पधारो

आई सावन बहार, करे पवनियां शोर।

छाई घटा घनघोर, नाचें मोर चकोर ।।

नाचें भौर पपीहे, कूके कोयल कारी-झूला झूलन पधारो.

घुंघट कलियों ने खोले, आया फूलों पे शबाब ।

चंदन केसर चम्बा, महके मोतिया गुलाब ।।

रसभरी बूंदा-बांदी, चहूं ओर हरियारी-झूला झूलन पधारो.

पड़ा यमुना किनारे, झूला कदम्ब की डार।

ऋतु बड़ी ही सुहानी, पड़े शीतल फुहार ।।

छाया हर्षोल्लास, छाई मस्ती है भारी-झूला झूलन पधारो. झूला पड़ा है तैयार, होवे जय जयकार।

आवो आवो 'मधुप', हरि युगल सरकार ।।

आवो झूला झुलावो, हो रही इन्तज़ारी-झूला झूलन पधारो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।