चल साई के दवार साईं

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

चल साईं के दवार साईं भाग्यबिदाता उसकी महिमा अप्रमपार,

नैना मेरे भर आये साईं की याद सताए,

दुनिया जिसे ठुकराए साईं गले से लगाए,

हम भी तेरी शोहरत सुन के बाबा तेरी शिर्डी में आये,

साईं दुनिया से कहते है कारवा,

कल जो कुछ भी हुआ है,

उसका अलग ही मजा है,

जो साईं चाहते है वो ही आज हुआ है,

तकलीफों में जीना सीखो यही महोबत का मजा है,

चल आ चल आ साथ मेरे........

पत्थर रो पड़ता है दुःख से क्यों डरता है,

साईं सबका दाता अच्छा ही करता है,

दुनिया उसको भूल न पाए जो रब पे मरता है,

चल आ चल आ साथ मेरे........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।