मोटी सेठानी मैंने भी बनादे छोटी सेठानी

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॥ पावन पाठ ॥

मोटी सेठानी मनने भी बना दे छोटी सेठानी मोटी सेठानी,

आये तेरे दवार भी बना दे छोटी सेठानी मोटी सेठानी,

तेरे भरोसे गली गली में मोटा मोटा सेठ फिरा,

कितने कामा चाल रह्य घर का दाना पानी मोटी सेठानी,

मोटी सेठानी......

सेठानी बन कर के तेरा मंगल पाठ करूंगी,

झूम झूमकर नाचुगी मैं बनकर दीवानी मोटी सेठानी,

मोटी सेठानी......

सारे जग ने बांटो हो थे या ही सुन कर आई जी

नज़र खोल कर देख तू दादी महरे भी कानी मोटी सेठानी.

मोटी सेठानी.....

चलनी के पल्ले से दादी थोडा माल लुतादे,

श्याम कहवे मिलसी धन दौलत बंगला और गाड़ी मोटी सेठानी,

मोटी सेठानी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।