हे गणपति दीनदयाल प्रभु हमें शरण लगा लो तू जाने

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

हे गणपति दीनदयाल प्रभु

हमें शरण लगा लो तो जाने।

तुम देव मेरे में दास तेरा ,

मुझको अपना लो तो जाने।

भक्तों ने तेरी पुकार करी,

आ नाव मेरी मझदार पड़ी।

मेरी इस भट्टकी नैया को,

उसे पार लगा दो तो जाने।।

द्वारे पे सवाली जो आया,

मुंह मांगा वर उसने पाया।

मेरी भी बिगड़ी किस्मत को,

प्रभु आप बनादो तो जाने।।

तुम रिद्ध सिद्धि के दाता हो,

दुखियों के भाग्य विधाता हो।

"राजेंद्र"को जो निज चरणों से,

प्रभु आप लागलो तो जाने।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।