मैं करां विणती ,सुण ले रे, ओ मण्डपिया के सांवरिया....

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं करां विणती ,सुण ले रे,

ओ मण्डपिया के सांवरिया....

कई भगता ने दीदो रे,मारी सामे नालो रे,

मैं आयो शरणा थारी रे,ओ मण्डपिया के सांवरिया l

मैं करां विणती ,सुण ले रे,

ओ मण्डपिया के सांवरिया......

छोरा-छोरी, दीदा घणा ने,पुरो परिवार बणायो रे,

मा पे भी हाथ धर दे रे ,ओ मण्डपिया के सांवरिया..ll

मैं करां विणती ,सुण ले रे,

ओ मण्डपिया के सांवरिया......

भंडारा सु निकले करोड़ा, बाठ दे तू थोड़ा थोड़ा

में थाके सरणे आग्यो रे ,ओ मण्डपिया के सांवरिया lll

मैं करां विणती ,सुण ले रे,

ओ मण्डपिया के सांवरिया....

गजेंद्र थारा भजन बनाया ,धर्मेंद्र थारा भजन सुनाया

में दोन्यू हाथ जोड़ा रे, ओ मण्डपिया के सांवरिया IV

मैं करां विणती ,सुण ले रे,

ओ मण्डपिया के सांवरिया.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।