मेरो छोटो-छोटो ठाकुर वा की छोटी छोटी अखियां

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

शयन आरती

मेरो छोटो छोटो ठाकुर वा की छोटी छोटी अखियां

वा की नन्ही नन्ही अखियों मे तु समा जा प्यारी

निंदिया

ओ मेरो.....

1.छोटो सो है ठाकुर मेरो,दो नैना कजरारे

बांकी अल्कन तिरछी चितवन,जो देखें मन हारे

वाकी बांकी चितवन को,चुरा जा प्यारी प्यारी

निंदिया

ओ मेरो....

2.ठाकुर मेरो भोलो भालो,करे रसीली बतियां

मधुरी मधुरी वाणी सुन कर,शीतल होंवे सखियां

वाकी मधुरी मधुरी वाणी में तुं,समा जा प्यारी

निंदिया

ओ मेरो.....

3.मैय्या सुलावे पलना में अब,सोवत नंद गोसंईया

देत असीस सबै बृजवासिन,ग्वाल बाल और

गंईया

वाकी बांकी झांकी चितवन,को चुरा जा प्यारी

निंदिया

ओ मेरो....

वाकी नन्ही नन्ही अंखियों मे तुं,समा जा प्यारी

निंदिया मेरो छोटो-छोटो ठाकुर,वाकी छोटी-

छोटी अंखियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।