भजन कर प्राणी-2,बिती जा रही है तेरी जिंन्दगानीं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भजन कर प्राणी-2, बिती जा रही है तेरी

जिंन्दगानी-2

भजन कर....

1.स्वांसों की माला पे तूॅं,हरि नाम गा ले-2

मन बावंरे को हरि,भजंन में लगा ले-2

क्यों तूॅं समझे ना,नादान प्राणी-2

बिती जा रही‌ है,तेरी जिंन्दगानी-2

भजन कर....

शैर-जिंन्दगीं में जिंन्दगीं का राज़ पाना

चाहिए।

जिंन्दगीं में जिंन्दगीं को मुस्कुरांना

चाहिए।।

जिंन्दगीं में जिंन्दगी की शर्त अगर पुरी

ना हो।

तो जिंन्दगीं को जिंन्दगीं से रूठ जाना

चाहिए।।

2.हरि गुरू सतंन‌ की,सेवा ना किंनीं-2

मुरख़ चादर मैंली किंनीं तुॅंनें-2

गुरू आग्या तुनें नहीं मानीं-2

बिती जा रही है,तेरी जिंन्दगानीं-2

भजन कर....

3.झुठे जग में,मन ललचावे-2

अंत समय कोऊ,काम ना आवे-2

फिर भी ना समझे,तूॅं अभिमानी-2

बिती जा रही है,तेरी जिंन्दगानीं-2

भजन कर....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।