गुरु जी शुक्रगुजार हा तेरे सानु आपना तुसी बना लिया,

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

दर दर ते असी रूलदे सी , सानु गुरू जी चरनी ला लिया -(2)

गुरू जी शुक्रगुजार हा तेरे , सानु आपना तुसी बना लिया, शुक्रगुजार हा तेरे सानु आपना तुसी बना लिया़ंं़़़़़़़़़़़़ (1)मोह-माया तो पला छुडाया, (सच दा सानु पाठ पढ़ाया)) 2, ऐसी किरपा कीती गुरू जी,(सुखा वाला बुटा लाया,)2सानु सिधे रसते पा के-2, दुखा तो बचा लिया,

गुरू जी शुक्रगुजार हा ़़़़़़़़़़़़़़़़़़

(2)तुहानु कदे भुला नहीं सकदे,(ए मन च खयाल लिया नी सकदे,)-2

तुहाडे एहसाना दा करजा,( गुरू जी असी चुका नहीं सकदे,)-2

तुहाडे नाम दा चपु ला के,-2 भवसागर पार करा लिया

गुरू जी शुक्रगुजार हा तेरे ़़़़़़़़़

(3)दुनिया बिच साडा मान वधाया, (फरशा तो अरशा पहुंचाया,)-2

साडे उते रहमत करके (,मेहरा दा तुसी मीह वरसाया,)-2

विपन शर्मा बिट्टू आ के,-2 जीवन सफल बना लिया

गुरू जी शुक्रगुजार हा तेरे ़़़़़़़़

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।