तुम दर पे आओ रे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

झूमके गाओ रे

जयकारे लगाओ रे

माँ का दरबार सजा है

तुम दर पे आओ रे

झूमके गाओ रे

जयकारे लगाओ रे

दरबार है माँ का

रहमतों का खज़ाना

चले आओ दर पे

कुछ चाहो जो पाना

तुम भी चले आओ रे

माँ का दरबार सजा है

तुम दर पे आओ रे

झूमके गाओ रे

जयकारे लगाओ रे

माँ के चरणों में

झुकता है संसार सारा

आता है पनाह में

पाने को सहारा

तुम भी चले आओ रे

माँ का दरबार सजा है

तुम दर पे आओ रे

झूमके गाओ रे

जयकारे लगाओ रे

मन में भर श्रद्धा

माँ का जो ध्यान धरे

देवे सुख सारे

माई दुख दूर करे

राजीव तुम भी चले आओ रे

माँ का दरबार सजा है

तुम दर पे आओ रे

झूमके गाओ रे

जयकारे लगाओ रे

©राजीव त्यागी

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नजफगढ़ नई दिल्ली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।