मुरली बजाऐ नन्दलाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मुरली बजाऐ नन्दलाल

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मुरली, बजाऐ नन्दलाल, राधा नाच रही ll

ओ राधा, नाच रही*, ओ राधा, नाच रही ll

मुरली, बजाऐ नन्दलाल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

राधा ने, पहनी है, सोने की मुकूटी ll

मोर, पंख मेरा श्याम, राधा नाच रही l

मुरली, बजाऐ नन्दलाल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

राधा ने, पहनी है, मख़मल की साड़ी ll

पीताम्बर, मेरा श्याम, राधा नाच रही l

मुरली, बजाऐ नन्दलाल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

राधा, लगाए, कुम-कुम का टीका ll

चन्दन, लगाए मेरा श्याम, राधा नाच रही l

मुरली, बजाऐ नन्दलाल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

राधा ने, पहना है, सोने का हरवा ll

फूलों की, माला मेरा श्याम, राधा नाच रही l

मुरली, बजाऐ नन्दलाल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

भक्त, कान्हा का, भजन सुनाए ll

रास, रचाए मेरा श्याम, राधा नाच रही l

मुरली, बजाऐ नन्दलाल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।