आए अवध जगतपति प्यारे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज- मेरे ढोल दी चिट्टी कोई आयी (पंजाबी)

आए अवध जगतपति प्यारे, राम रघुवंश मणि।

यज्ञ सरिंगी दा, बहार लैके आ गया।

फलया कल्पतरू, मंगल छा गया।।

पूरे होए इकरार अज सारे- राम रघुवंश....

शेष संग शेषपति, लै अवतार आए।

ज्योतिषी बन शम्भु, करन दीदार आए।।

मिले इष्ट नूँ प्यारे- राम रघुवंश.....

कमल जहे नैन, मथा चंन वांगू हसदा।

शाम सिलोना राम, नूर ब्रह्माण्ड दा।।

मन मोहने बाल घुंघुरारे- राम रघुवंश......

पापी पारखंडा सब डोले घबराए ने।

मुके दुःख धरती दे, देव हरषाए ने।।

चन सूरज चनकन तारे- राम रघुवंश......

करके दीदार अज, बिगडी संवार लौ।

तपदे अशांत मन, कर ठण्डे ठार लौ।।

मुखों बोल मधुप जय जयकारे- राम रघुवंश.......।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।