संग जोगी दा

---विजय कुमार
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॥ पावन पाठ ॥

चैत महीने संग जोगी दा पैदल टूर के चला,

आजो सब चलिए भैना करदिया गला।

1) बड़े चीरा तो नाथ मेरे ने दरते नहींओ बुलाया,

एक दिन मेनू सपने दे विच आके आप जगाया-2

सारी दुनिया दरते चली तू क्यों रह गया कला,

आजो सब-----------------

2) ओहदे दर ते जा के तु भूल लवी बखसा,

मैं ते तेनु नही भुलिया तुहिओ दिता भुला-2

मेहरा वाला मेहर करूंगा आगे कर देयी पला,

आजो सब-------------------

3) सच्चे दिल नाल जो भी जावे कदे ना खाली मुड़े,

अपने पूजन वालिया दा औ कदे भी दिल ना तोड़े-2

ओहदे रंग विच साहिल रंग जा लोकी आखन झला,

आजो सब---------------------

सिंगर----साहिल निमाना 89685-89773

लेखक----विजय कुमार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।