राही जागो हुआ अब सवेरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण गुरु वाणी कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सदगुरु वाणी

राही जागो हुआ अब सवेरा,सारी रजनी तो सो ही चुके हो,

अपनी जीवन की अनमोल श्वांसा व्यर्थ विषयों में खो ही चुके हो।

अपना प्रारब्ध हो जैसे जहाँ से वैसे परिणाम मिलते वहाँ से,

मीठे फल अब मिलेंगे कहाँ से, बीज कड़वे तो बो ही चुके हो।

माँगता ही रहा भोग भिक्षा , पूरी हुई न कभी मन की इच्क्षा,

भूलकर संत सदगुरु की शिक्षा, सैकडौ़ं बार रो ही चुके हो।

राम सीता प्रणत के हैं पालक ,सोचो "राजेश" हम उनके हैं बालक,

बनके बेकार दुनिया में मालिक व्यर्थ का बोझ ढो ही चुके हो।

राही जागो हुआ अब सवेरा,सारी रजनी तो सो ही चुके हो....।

जय गुरुदेव

सादर जय सियाराम।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।