लंका में डंका श्री राम का

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

-----भजन के बोल-----

मैं माँ अंजनी का लाला , श्री राम भक्त मतवाला…….2

मेरा सोटा चल गया रे , बजा डंका राम का,

लंका में बज गया रे , डंका श्री राम का।

1) मैं राम दूत बन आया , सीता का पता लगाया,

तू अहंकार में अंधा , तू ने अपना रौब जमाया,

बाहर अन्दर से काला , करता रहा गड बड़ झाला,

मेरा सोटा चल गया रे , बजा डंका राम का ……..2

2 ) मुझे जोर से भूख लगी थी , सोचा थोड़े फल खालू,

ये सोच के पेड़ चढ़ा था , इस पेड़ की आग बुझालू,

किया जम्बू ने घोटाला , मेरे हाथ से छीना निवाला,

मेरा सोटा चल गया रे , बजा डंका राम का ……..2

3 ) मैंने अक्षय को है मारा , आ मेघनाथ ललकारा,

जब एक चली ना उसकी , ब्रह्मास्त्र मुझ पे डारा,

ब्रह्मा का मान रख डाला , में बंध गया बजरंग बाला,

मेरा सोटा चल गया रे , बजा डंका राम का ……..2

4 ) फिर तू गुस्से में आया , और मुझे खूब धमकाया,

मेरी पूँछ में आग लगाई , ना ज्यादा समय गवाया,

वहाँ भड़की ऐसी ज्वाला , लंका का हुआ दिवाला,

मेरा सोटा चल गया रे , बजा डंका राम का ……..2

5 ) कहे भूलन लंक जलाई , तेरी अकल में कुछ ना आई,

लंका विध्वंस करके , अब लेट गया अनुयाई,

ना जपी राम की माला , हो गया कुटुम्ब का गाला,

मेरा सोटा चल गया रे , बजा डंका राम का ……..2।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।