आई सिंघ पे सवार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आई सिंघ पे सवार

आई, सिंघ पे सवार, मईया ओढ़े चुनरी ॥

ओढ़े, चुनरी, मईया ओढ़े चुनरी ,

आई, सिंघ पे सवार, मईया.............

आदि शक्ति है, मात भवानी, जय दुर्गे माँ काली l

बड़े बड़े, राक्षस संघारे, रण चंडी मतवाली ll

करे, भक्तों का, उद्दार 'मईया ll, ओढ़े चुनरी..........

आई, सिंघ पे सवार, मईया.............

महिषासुर सा, महाँ बली, देवों को ख़ूब सताया l

छीन लिया, इन्द्रासन और, देवों को मार भगाया ll

करी, देवों ने, पुकार 'मईया ll, ओढ़े चुनरी..........

आई, सिंघ पे सवार, मईया..........

दुर्गा का, अवतार लिया झट, महिषासुर संघारी l

दूर किया, देवों का संकट, लीला तेरी न्यारी ll

किया, देवों पे, उपकार 'मईया ll, ओढ़े चुनर............

आई, सिंघ पे सवार, मईया...........

जो कोई जिस, मनसा से मईया, द्वार तिहारे जाता l

हर इच्छा, होती पूरी और, मुँह माँगा फल पता

तेरा, गुण गावे, संसार 'मईया ll, ओढ़े चुनरी

आई, सिंघ पे सवार, मईया........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।