कह देना डमरू वाले से, तेरे द्वार पुजारी आया है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कह देना डमरू वाले से तेरे द्वार पुजारी आया है,

तेरे द्वार पुजारी आया है तेरे द्वार पुजारी आया है,

ना थाली है ना लोटा है,

ना थाली है ना कलशा,

खाली हाथों पुजारी आया है,

तेरे द्वार पुजारी आया है,

कह देना डमरू वाले से तेरे द्वार पुजारी आया है,

कह देना डमरू वाले से तेरे द्वार पुजारी आया है।

ना रोली है ना मोली है,

बस मन की माला लाया है,

तेरे द्वार पुजारी आया है,

कह देना डमरू वाले से तेरे द्वार पुजारी आया है,

कह देना डमरू वाले से तेरे द्वार पुजारी आया है।

ना लड्डू है ना पेड़ा है,

बस भाव का जल ही लाया है,

तेरे द्वार पुजारी आया है,

कह देना डमरू वाले से तेरे द्वार पुजारी आया है,

कह देना डमरू वाले से तेरे द्वार पुजारी आया ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।