चल हंसा उस देश समद जहां मोती रे

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

दोहा - कस्तूरी कुंडल बसे मृग ढूंढे वन माही,

ऐसे घट घट राम है दुनिया खोजत नाही ।।

चल हंसा उस देश समद जहां मोती रे,

समद जहां मोती समद जहां मोती समद जहां मोती रे......

चल हंसा वो देश निराला,

बिन शशी बान रहे उजारा ।

जहां लगे ना काल की चोट, हो जग मग ज्योति रे,

चल हंसा उस देश.......

जब चलने की करी तैयारी,

माया जाल फस्या अति भारी।

करले सोच विचार घड़ी दो होती रे,

चल हंसा उस देश.......

चाल पढ्या जब दुविधा छुटी,

पिछली प्रीत कुटुंब से टूटी ।

हंसा भरी उड़ान हंसनी रोती रे,

चल हंसा उस देश......

जाय किया समद में बासा,

फेर नही आवाण की आशा ।

गावे भानीनाथ मौत सिर सोती रे,

चल हंसा उस देश......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।