भजन बिन काया तेरा फीका पड़ गया नूर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दोहा -की राम भजन कर बावरा तू कर कर मन में सोच,

बार बार मिलसी नहीं या मिनख पणा री मोज।

सतगुरु थारा देश में बैठया तीन रत्न,

एक भक्ति एक शक्ति और तीसरा है सत्संग ।।

भजन बिन काया तेरा फीका पड़ गया नूर,

फीका पड़ गया नूर रे तेरा फीका पड़ गया नूर,।।

भजन बिन काया तेरा फीका पड़ गया नूर......

जिस मुख जावे पान और बीड़ी,

उस मुख निकले बड़ बड़ कीड़ी।

घर की तिर्या आवे ना निडी,

घर से मुखड़ा मोड़ ले रे भाई घर से मुखड़ा ले अब सब से हो जा दूर ।।

भजन बिन काया तेरा फीका पड़ गया नूर......

रे के के तेल लगावे अंगा,

एक दिन दरेंगे चिता पर नंगा ।

हो राख हो जिसमे तेरी भुजंगा,

लगा फूस में गेरे रे पतंगा,

अरे कोई दक दक काया जलती अरे अग्नि की उठ रही लुर ।।

भजन बिन काया तेरा फीका पड़ गया नूर.......

अरे के काढ़े नर इसी आट,

एक दिन जावेगा मुर्दा घाट में ।

लठ की मारे तेरी टाट में,

तेरी करे रे कपाली ने चूर ।।

भजन बिन काया तेरा फीका पड़ गया नूर.......

राजा रंक सभी चले जावे,

सबकी बिगुल बाजती आवे ।

आशाराम हरी गुण गावे,

कोई साहेब मिले री जरूर ।।

भजन बिन काया तेरा फीका पड़ गया नूर.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।