माई नौ दिन की मेहमान

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

माई नव दिन की मेहमान, गवुर बाई आई पावणी।

थारा गरबा म नाचे सारी रात, गवुर बाई आई पावणी।।

देवउं झालरिया घूमी घूमी आज, गवुर बाई आई पावणी।।

दादुर मोर पपिहा बोले-2

असी कोयलड़ी कूके डार, गवुर बाई आई पावणी।

ओ मैया कर सोलह श्रृंगार, गवुर बाई आई पावणी।

माई नौ दिन की मेहमान.........

ब्रह्ममा जी नाचे विष्णु जी नाचे-2

असा भोले बाबा डमरू बजाय, गवुर बाई आई पावनी।

थारा गरबा म नाचूं सारी रात.........

चंदा भी नाचे सूरज भी नाचे-2

असा तारा भी शोर मचाय, गवुर बाई आई पावनी।

ओ माई कर सोलह श्रृंगार, गवुर बाई आई पावनी।

माई नव दिन की मेहमान, गवुर बाई आई पावनी।।

। डॉ सजन सोलंकी।

मोब 9111337188

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।