पत्थर की मूरत बोल पड़ी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पत्थर की मूरत बोल पड़ी

पत्थर की, मूरत बोल पड़ी, क्या मुझे, मनाने आया है ll

तेरे घर में, जननी तड़प रही ll, क्या तुझे, तरस नहीं आया है ,

पत्थर की, मूरत बोल पड़ी.........

घर में तेरी, मईया भूखी है, क्या उस से, भोजन की पूछी ll

मुझे भोग, लगाने को बेटा ll, यह छप्पन, भोग लाया है ,

पत्थर की, मूरत बोल पड़ी...........

प्यासी घर में, तेरी माँ बैठी, बूंद बूंद को, बेटा तरस रही ll

क्या मुझे, पिलाने को बेटा ll, तूँ भर भर, लोटा लाया है ,

पत्थर की, मूरत बोल पड़ी............

तेरी माँ के, कपड़े फ़टे हुए, एक साड़ी, तक ना लाया है ll

और मुझे, ओढ़ाने को बेटा ll, तूँ लाल, चुनरिया लाया है ,

पत्थर की, मूरत बोल पड़ी...........

तेरी एक, झलक को पाने को, कब से तेरी, मईया तरस रही ll

मेरी एक, झलक ही पाने को ll, तूँ मीलों, चलकर आया है ,

पत्थर की, मूरत बोल पड़ी...........

तूँ अपनी, माँ को मना लेना, सीने से, उसे लगा लेना ll

तेरे सारे, कष्ट ही मिट जाएंगे ll, क्यों मुझे, मनाने आया है ,

पत्थर की, मूरत बोल पड़ी............

सुन लो अब, दुनियाँ वालो तुम, अपने मात पिता की, सेवा करो ll

उस में ही, माँ दुर्गा बैठी ll, महाँ माया की, सब माया है ,

पत्थर की, मूरत बोल पड़ी............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।