सखी नार बनादो आज नंद लाल को

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

धुन: भावें हां करदे भावें नांह करदे

पकड़ो पकड़ो ग्वाल को, कसरें सब निकाल दो।

सखी नार बनादो आज नंद लाल को॥

बार बार बरसे बरसाने, बरसानां बरसा दो ।

बच न पाए छेल छबीला, लट्ठ होरी बरसा दो ॥

सारा रंग डाल दो, बरसावो गुलाल को,

कारे कनुवा को सखी, आज कर लाल दो -पकड़ो०

मोर मुकूट ली छीन मुरलिया, छीन लियो पिचकारी ।

चोली चुनरी बिंदीया बाली, नथनी नाक में डारी ॥

कजला नैन डाल दो, घुंगटा भी निकाल दो,

लगे नई नई गुजरीया, कोई कमाल को - पकड़ो०

ब्रजनारी दे दे कर गारी, तारी खूब बजायो ।

प्रेम - पाश में बांध सांवरा, फागुन फाग मनायो ॥

गाजे बाजे ताल को, रंग दो लठ-ढाल को,

घेरा डार नचावो री, सखी गोपाल को - पकड़ो०

बरसा रंग गुलाल 'मधुप' जो, खूब मची ब्रज होरी ।

लाडली - लाल ग्वाल-बाल सब, भीगे छोरा - छोरी ॥

यह लीला गोपाल को, भगत प्रतिपाल को,

रंग होरी का यह काटे, जग जंजाल को - पकड़ो०

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।