॥ पावन पाठ ॥
तर्ज:- नी मैं नचना मोहन दे नाल
होली खेलनी ए अज तेरे नाल, वृन्दावन रैंहन वालया
वृन्दावन रैंहन वालया, गोकुल च रैंहन वालया
1 थक गये खेल खेल जग नाल होलीयां
भर भर रंगां दीयां गागरां कई डोलीयां
रंग उतर गया नालो नाल, वृन्दावन रैंहन वालया