होली खेलनी ए अज तेरे नाल सालासर रैहन वालया

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज:- नी मैं नचना मोहन दे नाल

होली खेलनी ए अज तेरे नाल,

सालासर रैहन वालया ॥

गिन गिन सावन, कई फाग बिताए ।

हर वार बाला जी बेरंग घर आए ।

तुसां पुछथा असां दा न हाल - सालासर...

जग दे रंगां नूं की करना ए बाला ।

असां तां तेरे रंग रंगना ए बाला ॥

सानूं करदे माला-माल - सालासर...

खोल दे बाला अज रंग दी तिजोरी ।

खूब मचादे सालासर विच होरी ॥

सबै हो जान लालो लाल - सालासर...

अंग अंग रंग साडा मार पिचकारी ।

रंग दे 'मधुप' अज दुनिया ए सारी ॥

रोम रोम साडा करदे निहाल - सालासर...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।