कान्हा होली खेले राधा रानी के द्वार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा आये बरसाने, राधा रानी के द्वार

चली आई सारी गोपियाँ, हो गोपियाँ, हो गोपियाँ, हो गोपियाँ

होली खेलन लठमार, जय हो, जय हो, होली है

1 ) मस्ती है सब पे छाई, फागुण की मस्त बहार

कही पिचकारी है हाथ में

है रंगों की बौछार, जय हो, जय हो, होली है

2 ) होली का अच्छा मौका, करने को नैना चार

एक गोरी है एक कारो

दोनों का सच्चा प्यार, जय हो, जय हो, होली है

3 ) लठ मारे खूब गोपिया, और झेले कृष्ण मुरार

ग्वाले तो खूब बचा रहे

पर नही बसावे पार, जय हो, जय हो, होली है

4 ) सब रंग गुलाल उड़ा रहे, मगन कान्हा को पुकार

भूलन त्यागी ये जाने

हो मची है मारा मार, जय हो, जय हो, होली है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।