गोरां नी तेरा बुड्ढा लाड़ा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कोई आखे डमरू वाला कोई आखे सप्पा वाला

कोई आखे एह रगड़े लोंदा पीवे भंग दा प्याला

बुड्ढा लाड़ा गौरां नी तेरा बुड्ढा लाड़ा बम बम बम बम ( 2 )

बैल ते चढ़ के आ गया नी तेरा बुड्ढा लाड़ा

ओहदा गज गज लमके दाड़ा नी तेरा बुड्ढा लाड़ा

बैल ते चढ़ के आ गया नी तेरा बुड्ढा लाड़ा.....

जंज वेख़ के भाजड़ पै गई , दुनिया हक्की बक्की रह गई

बम बम बम बम बोल के भोला, बूहे अगे आ गया नी तेरा बुड्ढा लाड़ा

बैल ते चढ़ के आ गया नी तेरा......

भूत चड़ेलां नचदे गौंदे, शुक्र शनिचर भड़थू पोंदे

दो बच्चियां दा टोला गौरां, राशन सारा मुका गया नी तेरा बुड्ढा लाड़ा

बैल ते चढ़ के आ गया नी तेरा.........

शिव शंकर दी लीला न्यारी , तीन लोक दा मालक भंडारी

शिव गौरां दे विआह दी महिमा , कम्मा – शैली गा गया नी तेरा बुड्ढा लाड़ा

बैल ते चढ़ के आ गया नी तेरा बुड्ढा लाड़ा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।