मेरे भोले बाबा आये हैं

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गले नागों के हार, माथे गंगा की धार

और नंदी पर असवार

मेरे भोले बाबा आये हैं

भोले पीते हैं विष का प्याला,

और देवों का दुख हर डाला

गले….

भोले माथे पे चंदा साजे,

और हाथों में डमरू बाजे

गले…

ऊँचे पर्वत पे डाले डेरा,

मैं हूँ भोले का. भोला है मेरा

गले….

बाबा ने कौशल ने गुण है गाया,

तूने चरणों से अपने लगाया

गले….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।