म्हारी रनू बाई क माननी बुलाई गणगौर गणेश कुशवाह

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

म्हारी रणु बाई क मननि बुलाई ,खेलण आई गणगौर माई

गणगोर खेलण हाउ झमराल गली गई थी,

न व्हासी , न व्हासी टोपली लई आईं ,

खेलण आई गणगोर माई

म्हारी रणु बाई क मननि बुलाई ,खेलण आई गणगौर माई

गणगोर खेलण हाउ किसान गली गई थी,

न व्हासी , न व्हासी घउ लई आईं ,

खेलण आई गणगोर माई

म्हारी रणु बाई क मननि बुलाई ,खेलण आई गणगौर माई

गणगोर खेलण हाउ पंचायती गली गई थी,

न व्हासी , न व्हासी चूंदड़ लई आईं ,

खेलण आई गणगोर माई

म्हारी रणु बाई क मननि बुलाई ,खेलण आई गणगौर माई

गणगोर खेलण हाउ कुम्हार गली गई थी ,

न व्हासी , न व्हासी दिवलो लई आईं ,

खेलण आई गणगोर माई

म्हारी रणु बाई क मननि बुलाई ,खेलण आई गणगौर माई

गणगोर खेलण हाउ सुतार गली गई थी ,

न व्हासी , न व्हासी बाजुठ लई आईं ,

खेलण आई गणगोर माई

म्हारी रणु बाई क मननि बुलाई ,खेलण आई गणगौर माई

गायक कलाकार गणेश कुशवाह

राजपुर जिला बड़वानी M,P,

मुरली DJ राजपुर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।