हरि सुमिरन नित करो रे सावरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हरि सुमिरन नित करो रे सावरिया,

जरा संभल संभल कही जाए न निकल,

घड़ी हाथो से हाथो से,

हरि सुमिरन नित करो रे सावरिया.......

जब तू आया इस दुनिया मे बन के नया मेहमान रे,

भूल गया तू सब कुछ अपना भक्ति भजन हरि नाम रे

नाम भजन में दाम न लगे ,

बन जाये सब काम रे ,

हरि भजन का था तेरा वादा रे सावरिया,

काहे गया तू बदल कही जाए ना निकल,

घड़ी हाथो से हाथो से ,

हरि सुमिरन.............

इस दुनिया की रीत निराली झूठी यह कि प्रीत रे,

हर सांस आह बसी है हर आंसू में गीत रे,

गीत की रीति मीत न जाने,

जग ना करे कोई प्रीत रे,

संग कभी ना कोई जाता रे सावरिया,

सारे जाएंगे बदल कही जाए न निकल,

घड़ी हाथो से हाथो से,

हरि सुमिरन नित करो रे सावरिया हरि सुमिरन,

ये भी सोचले बन्दे जाना तुझको आपने धाम रे,

ये जग है कुछ पल का मेला छोड़ बुरे सब काम रे,

भगती में ही तेरा भला है रट ले तू दिल रे नाम रे,

राम नाम ही तू रट ले सांवरियां ना

गवाए एक पल कही जाये ना निकल घडी हाथो से.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।