चरणों में गुरुवर के,प्रणाम करता हूँ

धर्माचार्य अशोक कृष्ण ठाकुर जी महाराज
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॥ पावन पाठ ॥

चरणों में गुरुवर के, प्रणाम करता हूँ,

स्वीकार कीजिए, दास की वंदना।

गुरुजी आप दयालु है, दयावान है,

करते रहते सदा, हमपे अहसान है,

भूल क्षमा कर देते है, और अपनी शरण में लेते है,

स्वीकार कीजिए, दास की वंदना,

हम तो भटक रहे थे, अंधकार में,

कोई मंज़िल नही थी, संसार में,

प्रेम का दीपक जला दिया, हमे धर्म का मार्ग दिखा दिया,

स्वीकार कीजिए, दास की वंदना,

अब तो मन में हमारे, यही है लगन,

कर दे किरपा तो हो जाए, प्रभु से मिलन

भक्ति का वर दे देना, थोड़ी सी सिफारिश कर देना,

स्वीकार कीजिए, दास की वंदना

स्वर - धर्माचार्य अशोक कृष्ण ठाकुर जी महाराज

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।