माँ तुरैया नहीं जांदा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ तुरैया नहीं जांदा सोन दा मेला आ गया,

मै आप लेजागी तू क्यों भगता खबरा गया,

धर्म धर्म दा मैं अपरादि किते पाप बथेरे,

चारे पसे गमा दे बदल छाए घोर अँधेरे

टरे पाप मित्तद, तु क्यों भगता .......

ना कोई दिलदा मेहरम मिलदा नाल जेहड़ा चले,

ना कोई संगी ना कोई साथी ना कोई पैसा पल्ले,

मै झोलिया भरदा गई ,तू क्यों भगता......

चहो युगा दी मालिक दाती दो जहाँ दी वाली,

दीद तेरे दा प्यासा दर तो मूड ना जावे खाली,

आंसा पूरी करदागी,तू क्यों भगता....

बड़े चिरा तो दरस दा प्यासा चरना विच लगावी,

ध्यानु लाल दे वांगु बिजली नु लाड लड़ावी,

मैं दरस दिखा दा गी तू क्यों भगता.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।