श्री राम जय राम जय जय राम हम आए शरण तुम्हारी राम

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

श्री राम जय राम जय जय राम

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{कलयुग केवल नाम अधारा ।

सुमिर सुमिर नर उतर ही पारा ॥}

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥

हम, आए शरण, तुम्हारी राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ।

हे, भक्तों के, हितकारी राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ।

हे, रघुपति, अव्ध बिहारी राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥

माँ, कौशल्या के, प्यारे राम,

हे, दशरथ राज, दुलारे राम,

करो, पूर्ण काज़, हमारे राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 1 ॥

मेरी, नईया पार, लगा दो राम,

मेरे, सोए भाग, जगा दो राम,

मेरे, दुखड़े दूर, भगा दो राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 2 ॥

मुझे, चरणों की दासी, बना लो राम,

मुझ, दीन को भी, अपना लो राम,

मैं, शरणागत हूँ, सम्भालो राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 3 ॥

यह, दुनियाँ, तेरे सहारे राम,

तूने, लाखों, पार उतारे राम,

तूँ डूबों, को भी, उभारे राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 4 ॥

दशरथ, नंदन, जय श्री राम ।

भव भय, भंजन, जय श्री राम ।

रघुपति, राघव, जय श्री राम ।

परधुन, दायक, जय श्री राम ।

श्याम, सरीरा, जय श्री राम ।

हरते, तीरा, जय श्री राम ।

जन, मनोरंजन, जय श्री राम ।

असुर, निकन्दन, जय श्री राम ।

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 5 ॥

शबरी ने, वाट, निहारी राम,

हर रोज़, ही राह, बुहारी राम,

पाई, उसने दया, तिहारी राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 6 ॥

भक्तों का, मान, बढ़ाया राम,

दुःखियों का, कष्ट, मिटाया राम,

निर्बल को, गले, लगाया राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 7 ॥

प्रेम का, नाता, भाए राम,

निर छल, नर ही, तुम्हें पाए राम,

तुम्हें, अभिमान न, सुहाए राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 8 ॥

शिव जी गाए, ब्रह्मा ध्याये,

रटे सरस्वती, जपे बृहस्पति,

ले खडताल, अंजनी का लाल,

हे झूम के गाए, सुध बिसराए,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 9 ॥

मेरे, अभिमान को, मिटा दो राम,

माया, का पर्दा, हटा दो राम,

मेरे, मोह के फंद, कटा दो राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 10 ॥

सुग्रीव, को कण्ठ, लगाया राम,

केवट, को भी, अपनाया राम,

फिर, मुझको क्यों, बिसराया राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 11 ॥

पत्थर की, अहल्ल्या, तारी राम,

राक्षसी, ताड़का, मारी राम,

तेरी, पग महिमा है, भारी राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 12 ॥

हाथ उठाओ, शरण लगाओ,

दीन दयाकर, हे करुणाकर,

दिल में तुम्हारी, छवि है प्यारी,

होंठो पे मेरे, गीत हो तेरे,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 13 ॥

तुम, अव्ध में हो, रघुराई राम,

गोकुल मे, श्याम, कन्हाई राम,

हर, रूप में दीन, सहाई राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 14 ॥

कभी, हाथ में धनुष, उठाते राम,

कभी, मुरली मधुर, बजाते राम,

हर रूप में, मन को, लुभाते राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 15 ॥

प्रह्लाद, ने तुम्हें, पुकारा राम,

तुम, लोह का खम्भ, बिदारा राम,

निज, भक्तों को दिया, सहारा राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 16 ॥

अंजनी लाला, रटते माला,

सुबहो शाम, आठों जाम,

दीन दिवाकर, ह्रदय लगाकर,

सब मिल गाए, अति सुख पाए,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 17 ॥

मेरे तुम्हीं, पिता मैं हूँ, तारी राम,

तुम दाता, और मैं, भिखारी राम,

तुम्हीं, मेरे गुरु, खरारी राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 18 ॥

अंजनी, लाला के, स्वामी राम,

सर्वज्ञय हो, अन्तर्यामी राम,

हम, दीन हीन, खल्कामी राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 19 ॥

तेरा नाम है, जिसके, दिल पर राम,

जल पर, तैरे वोह, पत्थर राम,

तेरा नाम, महान, हे रघुवर राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 20 ॥

हे रघुराई, करो सहाई,

नाथ खरारी, तुम सुखकारी,

प्रेम का नाता, तुमको भाता,

घट घट वासी, हे सुख राशि,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 21 ॥

श्री राम, नाम के, बल पर राम,

पत्थर, तैरे थे, जल पर राम,

सीता जी, बैठी, आनल पर राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 22 ॥

धन्ना ने, तुम्हें, बुलाया राम,

सूखी, रोटी का भोग, लगाया राम,

तूने, रुच रुच प्रेम, सिखाया राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 23 ॥

शबरी की, कुटिया, आए राम,

और, जूठे बेर भी, खाए राम ,

तूने, सब भेद, मिटाए राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 24 ॥

नर तन धरी, अवध बिहारी,

हे मस्तक चंदन, हे जग वंदन,

राज विलोचन, संकट मोचन,

त्रिभुवन स्वामी, अन्तर्यामी,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 25 ॥

हनुमत ने, तुमको, ध्याया राम,

पद, भक्त राज का, पाया राम,

श्री, रामदूत, कहलाया राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 26 ॥

अंजनी, लाला ने, गाया राम,

लंका, में डंका, बजाया राम,

रावण का, मान, घटाया राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 27 ॥

योगी, के नाथ, नियंता राम,

खड़दूषन, रावण, हन्ता राम,

तुम्हें, भजते सदा, हनुमंता राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 28 ॥

हे प्रभु मेरे, तुम को टेरे,

दास बना लो, अरे शरण लगा लो,

मुख न मोड़ो, दिल न तोड़ो,

देर न कीजै, अरे दर्शन दीजै,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 29 ॥

जिस, पर है दया, तुम्हारी राम,

उसको, न कोई, लाचारी राम,

हे जगत के, पालन, हारी राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 30 ॥

सब के, काज़, सँवारे राम,

लाखों को, पार, उतारे राम,

हे जगत के, पालन, हारे राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 31 ॥

कण कण में तूँ ही समाया राम,

तेरा पार कोई न पाया राम,

तेरी अज़ब निराली माया राम,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 32 ॥

भक्त पुकारे, साँझ सकारे,

सुना है हमने, अरे सदा है तुम में,

भक्त उभारे, कष्ट निबारे,

प्रभु निहारो, पार उतारो,

श्री राम, जय राम, जय जय राम ॥ 33 ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।