हे जगतारन देवी दुर्गा मईया

गौतम गुरूजी
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

।। हे जगतारन देवी दुर्गा मईया ।।

कइसे करबो दाई तोर बिदाई, लागत हावे भारी करलाई ।।

जोत जावरा लागे उसलईया... हे जगतारन देवी...

जब जब तोला देखेव मईया, तोरे मुहरन फूले वो मां

नजरे नज़र मा झूले तैहर, आंतस कइसे भूले वो मां

जैसे बेटी पहुना तिजा आथे, जोरे माया ला वोहर चले जाथे

अइसन दया माया के हस जगईया.... हे जगतारन देवी

नव दिन पूजा बरत करेहव, दशमी के तोला पठोहू वो मां

चलगे पुरखा के अलग चलागन, सगुरी मां तोला सरोहू वो मां

कईसन कईसन रचना ला बनाए, नेंग जोंग गढ़के रसदा ला बताए।

जान तीही हर दाई जनम देवईया... हे जगतारन देवी

माता बिदाई के आथे बेरा मन ह मोर सुररथे वो मां

काबर आथे ये दिन बादर कहिके जीवरा चुरथे वो मां

छाती फाटे नयना आसू ढारे, तोर बिनाअब करिही माया दुलारे

काहा पाबे गौतम अचरा के छईहा.... हे जगतारन देवी

।।कइसे करबो दाई तोर बिदाई, लागत हावे भारी करलाई।।

जोत जावरा लागे उसलईया... हे जगतारन देवी

____माता विसर्जन बिदाई गीत__

गीतकार : गौतम गुरूजी

गायक : दिवेश साहू

रिदम : राहुल निर्मलकर एंड बाबू भाई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।