कौन श्याम खोजे तू ऐ बावरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

त्रेता के श्री राम चन्द्र जी द्वापर में घण्यशयम,

नारायण अवतारी दोनो। दोनो के रंग श्याम ।

किस अवतारी श्याम को खोजे बोल री प्यारी अंखिया।

राम श्याम है श्याम राम है एक रूप दो अखियां।

कौन श्याम खोजे तू ऐ बावरिया।

ऐ बावरिया, ऐ बावरिया

एक श्याम दसरथ के ललना,

एक बने कृष्ण कन्हैया।

एक श्याम धनु भांजे जनक पुर।

एक बने नाग नथिया ।

एक श्याम लंका पति तारे।

एक बने कंस मड़ैया।

एक श्याम बन में मृग मारे,

एक बने रास रचैया।

कवि दिनेश कहे श्याम सुंदर

दो नैनन विच वसैया।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।