घर घर गीता का प्रचार हो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

घर-घर गीता का प्रचार हो

घर - घर गीता का प्रचार हो, सदाचार और सद्विचार हो।

पहले सा मेरा भारत ये, जगद्गुरु फिर एक बार हो॥

वेदों का उद्घोष मधुर हो, उपनिषदों का पाठ प्रचुर हो,

गीता, रामायण, भारत की, वाणी ही चहुँ ओर मुखर हो,

कृष्णम् वन्दे जगद्गुरुम् का, आवर्तन फिर एक बार हो ॥1॥

स्वाध्याय को हम अपनायें, दीन-दुःखी को गले लगायें,

जन-मन का सब क्लेश मिटायें, घर-घर में समृद्धि लायें,

शान्ति साधना के उपवन में, गीताजी का पाठ मधुर हो ॥2॥

सौध-सौध और सदन-सदन में, नर-नारी के वदन-वदन में,

कुटी-कुटी के बाल-बालिका, मठ-मन्दिर, विद्यालय, वन में,

आज भोज विक्रम के युग का, अनुवर्तन फिर एक बार हो ॥3॥

कौन करेगा पूरा प्रण ये, कौन कहे घर-घर जन-जन से ?

ज्ञानग्रन्थ गीता के गायक, पूर्ण करें हम ही इस प्रण को,

इक्कीसवीं सदी में अब ये, परिवर्तन फिर एक बार हो ॥4॥

संकल्पगीत - विश्वगीताप्रतिष्ठानम्

आचार्यः रमेशकुमारपाण्डेयः

संस्थापक, विश्वगीताप्रतिष्ठानम्

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।