गणतंत्र दिवस

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॥ पावन पाठ ॥

गणतंत्र दिवस

15 अगस्त को राजतंत्र से, स्वतंत्र हुआ हिंदोस्तान ।

26 जनवरी को अपनाया, हमने अपना निज संविधान ॥

राजतंत्र को कर समाप्त, जनतंत्र जब आता है ।

जनतंत्र वह गणतंत्र बन, लोकराज कहिलाता है ॥

लोकराज के ऋतुराज में,खिल उठता है गुलस्तान-26 जनवरी...

सभ्यता अरु संस्कार संस्कृति,भारत देश की आन है ।

बहु-संसदीय प्रणाली यहां, सर्वोपर संविधान है ॥

विश्व में भारत-गणतंत्र,सब से ऊंचा और महान-26 जनवरी...

गणतंत्र में सारी शक्ति , होती जनता हाथ है ।

आम चुनाव से जनता ही,सरकार बनाती आप है ॥

कानून अरु संविधान में,हर कोई यहां एक समान-26 जनवरी...

बाल वृद्ध तरु युवक-युवतियां,परम धरोहर देश की ।

सब के योगदान से उननति,हो रही भारत देश की ॥

तीन सैनाएं-तिरंगा-झण्डा, भारत देश की है शान-26 जनवरी...

‘मधुप’ "सत्यमेव जयते" , में विश्वास हमारा है ।

भारतमाता की जय,जय-हिन्द,वंदे मातरम् नारा है ॥

जन-गण-मन के राष्ट्रगान का,होता भारत में जयगान-26जनवरी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।