चौमासे की रात बर्सात मध भाई है

पारंपरिक
महादेव भजन खाटू श्याम भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चौमासे की रात बर्सात मध भाई है

तेरी यादं फेरु आई है

बरखा की झड़ी से आँसु की लडी भी दया सू मिल गई

मुरझाए चमन की कलियाँ कन्हैया की दया सू खिल गई

थाम ले वो हाथ रखी कितनी समाई है

दीनबंधु से फरियाद है मेरी संभालो साँवरा

बैंक खिवैया बस संसार सिंधु से बचालो साँवरा

कल्जे कि बात छानी तेरेसे टिकैयी है

श्याम बहादुर किशान शिव तू ही तेरे से प्यार है

बांसुरीवाला मस्तान निराला मेरा दिलदार है

खाई मैंने माद यही दिल की दवाई है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।