जय भगवद्गीते मैय्या जय भगवद्गीते

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आरती

जय भगवद्गीते मैय्या जय भगवद्गीते।

कर्म ज्ञान भक्ति की, गंगा सुपुनीते-जय.......

धर्म अधर्म के रण में, जब अर्जुन डोले।

गीता ज्ञान रहस्य, यदुनंदन खोले-जय.......

श्री कृष्ण मुख निकली, वेदमयी वाणी।

ग्रन्थ शिरोमणि गीता, माता कल्याणी-जय.....

ब्रह्म-योग ब्रह्म-विद्या,मन को वश में करे।

आतम ज्ञान बढ़ावे, पाप त्र्यताप हरे-जय......

सत्य धर्म ईश्वर की, भक्ति सिखलावे।

कर्तव्य नीति निष्ठा, मार्ग दिखलावे- जय.....

कुरूक्षेत्र में प्रगटी, वीरों की माता।

करे अनुसरण जो इसका, हरि दर्शन पाता-जय.....

मोह शोक भयहारी, विघ्न विकार हरे।

जीवन जोत जगावे, दूर अन्धकार करे-जय......

कहत ‘‘मधुप’’ कर वन्दन, आरती जो गावे।

बल भक्ति यश कीर्ति, मुक्ति वर पावे-जय......।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।