आ वे काहना आ मैं तां थक गई औसियाँ पा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आवे काहना आ

आ वे काहना आ मैं तां थक गई औसियाँ पा।

मैनुं तेरे मिलन दा चा मैं तां थक गई औसियाँ पा॥

अखाँ विचों रातां लंघदियाँ हो जावे नित सवेरा।

भुल भलेखे सिर देया साइयाँ पा कमली बल फेरा॥

चमक किथे पुनयां देया चन्दा कर दे दूर हनेरा।

आपाँ वार सीटां चरणा तो मैं तेरी तू मेरा॥

बंसी बजावे-करदे पूरा चा।

आ, मैं तां थक गई औसियाँ पा॥

विच उडीकां मुकदी जांदी कालयों धौले आये।

दीवे तयार बुझन नूं दोवें बैठी तेल मुकाये॥

हौके भरदी आसां करदी हुण आये हुण आये।

हुणे छणकया नूपुर पी दा ठण्डी वग नी वाहेये॥

रीझां ला ला बोल पपीहा-आ पी-आ पी-आ।

आ वे काहना आ मैं तां थक गई औसियाँ पा॥

नहीं पापण दे मथे लगणा सुपने विच ही आजा।

केढ़ी गलीं चुप चा साधी ओ गोकुल दे राजा॥

औगुण भुल सरकार साँवरी प्यार दा पाठ पढ़ा जा।

हसण दा मैनुं चा नहीं कोई रोणा ही सीखा जा॥

जेहड़ी गले तू खुश प्यारे-आन सुझा।

आ वे काहना आ मैं तां थक गई औसियाँ पा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।