हरि मोह पै नज़रे कर्म करो

पारंपरिक
विष्णु भगवान आरती विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

धुन :- स्वयं बनाये ( राग में )

हरि मोह पै नज़रे कर्म करो ,

सब जग छोड़ शरण में आयो ,सर पर हाथ धरो।।

यह जग बैरी पड़ो है ,बहु विधि नाच करो।

सर पर काम ,काम में वासना ,हिरदे कपट भरो।

विषय बेलि फलयो फल लागा ,मन चाखत न टरो।

चलत फिरत सुमिरन करे मनवा ,बैठ भजन न करो।

छूट गई सब आरती पूजा ,जप-माला न फिरो।

‘‘मधुप’’ कुञ्ज मैं कागा बोलत ,चित न हंस धरो।

गुरुदेव भव-भंजन स्वामी ,किस विध पार करो।

हरि मोह पै नज़रे कर्म करो...... ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।