जय जय अन्नपूर्णा माई

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॥ पावन पाठ ॥

जय जय अन्नपूर्णा माई,

जय जय अन्नपूर्णा माई।

रिद्ध सिद्ध अन्न धन्न वरदाती, जग तारन नूँ आई।।

जग दे सकल पदार्थ देखे, तेरे मात भण्ड़ारे,

राजा रंक फकीर पए मंगदे, मंगदी फिरे खुदाई।

जय जय.......

देवी देव ध्यावन, पावन पार न ग्रंथ कतेबां,

युग युग अंदर महिमां तेरी, ऋषियां मुनियां गाई ।

जय जय.......

कण कण तेरा नूर समाया, सब जग चानन होया,

मुंह मंगिया वर पावन सारे, सब दी आस पुचाई ।

जय जय.......

जीव जन्त रशपाल भवानी, शरणागत प्रितपाली,

कहे ‘‘मधुप’’ महासंकट हरणी, पल पल होत सहाई ।

जय जय....... ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।